Shama Shah First Jain Member of House of Lords British Parliament

कौन हैं शमा शाह? जो जैन समुदाय से ब्रिटिश संसद की पहली सदस्य बनीं, अपने धर्मग्रंथ को हाथ में लेकर ली शपथ, बढ़ाया गौरव

Shama Shah First Jain Member of House of Lords British Parliament

Shama Shah First Jain Member of House of Lords British Parliament

Who Is Shama Shah: ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में पहली बार कोई जैन सांसद बना है। जैन समुदाय की शमा शाह ने ये रिकॉर्ड दर्ज किया। वह ब्रिटिश संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स (House of Lords) की सदस्य बनने वाली पहली जैन प्रतिनिधि बन गई हैं। शमा शाह ने उस वक्त जैन समुदाय का सिर गर्व से और ऊंचा कर दिया, जब उन्होंने सदन के भीतर अपने धर्म के पवित्र ग्रंथ “समणसुत्तं” पर हाथ रखकर शपथ ली। ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में यह भी पहली बार ही हुआ जब किसी ब्रिटिश सांसद ने जैन धर्मग्रंथ पर शपथ ग्रहण की हो।

जैन समुदाय की शमा शाह ने न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन की यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है बल्कि आज वो पूरे जैन समाज और भारतीय मूल के लोगों के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय भी बनी हैं। पूरे जैन समाज के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। साथ ही भारत के लिए भी गर्व का पल है। शमा शाह ने केवल ब्रिटेन बल्कि भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में रहने वाले जैन समुदाय के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। शामा शाह की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।

कौन हैं Shama Shah?

1983 में जन्मीं शमा शाह ब्रिटेन की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और शिक्षक हैं। शिक्षा, सामुदायिक विकास, समानता, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर उनका विशेष योगदान रहा है। उनकी सेवाओं और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए वर्ष 2025-26 में उन्हें Life Peerage प्रदान किया गया, जिसके बाद वे हाउस ऑफ लॉर्ड्स की आधिकारिक सदस्य बनीं।

शमा शाह का क्या कहना?

शमा शाह ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हाउस ऑफ लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक लोकतांत्रिक संस्थान में, अपने धर्मग्रंथ को हाथ में लेकर, अपनी आस्था के शब्दों के साथ जनसेवा की शपथ लेना मेरे लिए अत्यंत गहन, भावनात्मक और सम्मानपूर्ण अनुभव था।”

House of Lords क्या है?

ज्ञात रहे कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स ब्रिटेन की संसद का उच्च सदन (Upper House) है। यह दुनिया के सबसे पुराने लोकतांत्रिक संस्थानों में से एक है, जहां महत्वपूर्ण कानूनों, नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और संशोधन किया जाता है।